चीन उल्टी-सीधी हरकतें फिर से शुरू हो गई है अब पितौड़गढ़ के पास सैनिक के बने ठिकाना पर आपत्ति जता रहा है।भारत भी है अब तैयार।इसी बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया केऑस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मॉरिसन से बातचीत पर और अधिक मिर्ची लग रही है। - सारी जानकारी हीन्दी और English

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शुक्रवार, 5 जून 2020

चीन उल्टी-सीधी हरकतें फिर से शुरू हो गई है अब पितौड़गढ़ के पास सैनिक के बने ठिकाना पर आपत्ति जता रहा है।भारत भी है अब तैयार।इसी बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया केऑस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मॉरिसन से बातचीत पर और अधिक मिर्ची लग रही है।

चीन उल्टी-सीधी हरकतें
लद्दाख के बाद चीन ने अब पिथौरागढ़ के पास में भी उकसाने वाली हरकतें शुरू कर दी है।चीनी सेना अब यहाँ भारतीय ठिकानों को लेकर आपत्ति जता रही है।चीनी सैनिक पिछले कुछ दिनों से भारत की ओर झंडे लहरा कर सीमा पर 200 मीटर भीतर बने भारत के टीन के शेडों को हटाने की चेतावनी दे रहे हैं। चीनी सैनिकों की ऐसी हरकतों को देखते हुए सुरक्षाबलों ने कड़ी निगरानी शुरू कर दी है।पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले यात्री और व्यापारी लिपू पास से ही चीन में प्रवेश करते हैं।
भारत भी है तैयार
चीनी सैनिकों की यह हरकतें देते हुए भारत सरकार ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी ) पर सेना ने बोफोर्स तोप की तैनाती शुरू कर दी है। लेह से करीब 60 बोफोर्स तोपों को एलएसी  को रवाना कर दिया है। शनिवार को भारत और चीन के बीच लेफ्टिनेंट जरनल स्तर के अधिकारों के बीच एलएसी पर तनाव और गतिरोध के समाधान पर केंद्रित बैठक प्रस्तावित है।
 

भारत के प्रधानमंत्री और ऑस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मॉरिसनके बीच बातचीत
हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन के खिलाफ मोर्चाबंदी करते हुए रक्षा सहयोग बढ़ाने तथा एक-दूसरे के सैन्य अड्डों के इस्तेमाल के लिए भारत-आस्ट्रेलिया के बीच बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मॉरिसन के बीच हुए पहले वर्चुअल शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने वाले सात समझौते हुए हैं। इस दौरान दोनों नेताओं ने कोरोना महामारी, आपसी सहयोग पर भी चर्चा की।

नए समझौते के बाद अब दोनों देशों की सेनाएं हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक-दूसरे के ठिकानों का इस्तेमाल हथियारों की मरम्मत और आपूर्ति केलिए कर सकेंगी। दरअसल, चीन को घेरने के लिए भारत ऐसा ही पहले अमेरिका, फ्रांस और सिंगापुर के साथ पहले कर चुका है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के साथ साइबर तकनीक, खनन व खनिज, सैन्य तकनीक,व्यावसायकि शिक्षा और जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के छह करार हुए। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने पर सहमति जताते हुए कहा, शांति और स्थिरता में आतंकवाद सबसे बड़ी बाधा है। इसे जड़ से खत्म करना होगा। दोनों ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन की मांग की।

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