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गुरुवार, 18 जून 2020

एक माहामारी ने दिखाई रिशर्तों की मजबूती

इस एक माहामारी ने हम इनसान की असलियत निकाल के रख दी हैं। आपको वता दे की यह काम सब वॉट्सएप ग्रुप पर मैसेज के द्वारा हो रहा है जहाँ टीम मृतक के मजहब के हिसाब से उसका अनतिम संस्कार करती है। पुणे के नगर निगम ने एक वॉट्सएप ग्रुप बनाया गया , इसमें सभी कोविड अस्पताल , दाह संस्कार करने वाली तीनों संस्थाओं , एंबुलेंस निगम अधिकारियों और स्टाफ को जोड़ा गया है ।


 किसी भी कोविड पॉजिटिव की मौत के बाद इस ग्रुप में उसकी डिटेल आती है । फौरन तीनों संस्थाएं मुस्तैद हो जाती हैं । संस्था वाले श्मशान घाट या कब्रिस्तान में बॉडी उतरवाते हैं । गाइडलाइंस और मजहब के अनुसार उस व्यक्ति के अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की जाती हैं । बच्चे का अंतिम संस्कार करने के लिए उनके मां - बाप क्वारेंटाइन में होने की बात कहकर मना कर रहे हैं , जबकि पुलिस की मदद से वे आ सकते थे । एक वेटा अपनी माँ की लाश लेने अस्पताल नही आता अगर उस वेटे से कुछ पुछा तो डॉक्टरों से ही कामी जी करने लगा। ऐसे ही  बीते दो महीनों में  तमाम रिश्तों को खत्म होते दिख रहे है । यह कहना है अरुण शिवशंकर जंगम एक एसए इंटरप्राइजेस के फाउंडर हैं ।

 पुणे में इनकी कंपनी को प्रशासन ने कोरोना से जान गंवाने वालों का अंतिम संस्कार करने का ठेका दिया है । पुणे देश का एकमात्र शहर है , जहां निजी कंपनी यह काम कर रही है । पिछले तीन महीनों में इस शहर ने रिश्तों को दरकते हुए देखा है । कोरोना मृतकों के दाह संस्कार की जवाबदारी संभाल रहीं नगर निगम की स्वास्थ्य अधिकारी कल्पना बलिंवत कहती हैं कि कोरोना पॉजिटिव की मौत पर परिवार वाले लाशें छोड़कर भाग रहे थे । किसी ने फोन स्विच ऑफ कर लिए तो किसी ने आने से मना कर दिया । अंतिम संस्कार के लिए एनओसी तक देने नहीं आते हैं । हद उस वक्त हो गई , जब एक श्मशान भूमि में एक केयरटेकर ही कोरोना पॉजिटिव की बॉडी देखकर भाग गया ।  ऐसी घटनाओं के बाद तीन धार्मिक संस्थाएं पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ( पीएफआई ) , एसए इंटरप्राइजेस और अल्फा आगे आई और मजहब के अनुसार अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी ली । पुणे में दो महीने से यह व्यवस्था ठीक चल रही थी , लेकिन राजनीती करने वाले इस समय भी पिछे नहीं हटते कुछ राजनेताओं को इससे भी परेशानी है यहाँ तक की माने वालों तक को नहीं छोड़ा यहाँ तक कि यहाँ पर भी धर्म जाती ड़ालने पर लगे हैं ये खुद ता करेंगे नहीं और दूसरो को भी काम करने से रोकेगे वाह क्या वात है, अचानक कुछ दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ट्वीट कर कहा कि सरकार ने मुंबई में मुस्लिमों के अंतिम संस्कार का काम राष्ट्रविरोधी संस्था पीएफआई को दिया है । इस पर राजनीति जोर पकड़ने लगी । फिर कुछ लोगों ने कहा कि पुणे नगर निगम में तो भाजपा है , वहां भी पीएफआई को काम दिया गया है । इसके बाद आनन - फानन में पुणे में पीएफआई की परमिशन रद्द कर दी गई । 
पुणे में विपक्ष ने इसे मुद्दा बना लिया और पीएफआई अदालत जाने की तैयारी कर रही है । मुस्लिमों के अंतिम संस्कार का काम अब उन्नत संस्था को दिया है । जबकि हिंदुओं की आखिरी रस्में निजी कंपनी एसए इंटरप्राइजेस निभा रही है । इसके शुल्क की कोई जानकारी नहीं दी गई है । पीएफआई पुणे के अध्यक्ष राजी बताते हैं कि उन्होंने कोरोना पॉजिटिवसंस्कार बॉडीज को दफनाने का काम उस वक्त शुरू किया , जब यहां कोई डेड बॉडी को हाथ लगाने को तैयार नहीं था । हम 140 मृतकों को दफना चुके हैं , अब सियासी वजहों से अनुमति रद्द की गई है । वहीं विपक्ष के नेता अरविंद शिंदे कहते हैं कि जब सब सही चल रहा था , एक भी शिकायत नहीं थी तो निगम ने पीएफआई की परमिशन क्यों रद्द की ? शिंदे का यह भी कहना है कि निगम अधिकारियों समेत सब पीएफआई के काम से संतुष्ट थे । जहां तक राष्ट्रविरोधी होने की बात है तो आरोप लगाने वालों पर भी राष्ट्रविरोधी होने के आरोप हैं । 


 

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