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बुधवार, 24 जून 2020

चीनी विदेश मंत्री के सामने बोले जयशंकर- वैश्विक व्यवस्था के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान जरूरी ।


वास्तविक नियंत्रण रेखा ( एलएसी ) पर जारी तनाव के बीच भारत ने चीन को कई मुद्दों पर नसीहतों की डोज दी । भारत - रूस - चीन के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान एस जयशंकर ने चीन को सहयोगी देशों के वैध हितों को मान्यता देने और बेहतर वैश्विक व्यवस्था के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की नसीहत दी ।इसमें चीन के विदेश मंत्री वांग यी भी शामिल थे ।

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जयशंकर ने कहा , ' यह विशेष बैठक अंतरराष्ट्रीय संबंधों के
कानून स्थापित सिद्धांतों पर हमारा विश्वास दोहराती है ।  लेकिन वर्तमान में चुनौतियां अवधारणा और मानदंड मात्र की नहीं हैं बल्कि उनके अमल की हैं । विश्व की प्रमुख आवाजों को हर तरीके से अनुकरणीय होना चाहिए । अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान , साझेदारों के वैध हितों को मान्यता देना , बहुपक्षवाद को समर्थन देना और सभी के हितों को बढ़ावा देना ही टिकाऊ विश्व व्यवस्था के निर्माण का एकमात्र तरीका  है ।
साथ ही उन्होंने संकट के वक्त भारत की ओर से की गई मदद याद दिलाते हुए चीन को डॉ . कोटनिस के योगदान याद दिलाए । त्रिपक्षीय बैठक का एजेंडा यूं तो कोरोना और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ा था लेकिन विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस मंच पर चीन को परोक्ष रूप से कई सख्त संदेश दिए । उन्होंने कहा , बेहतर वैश्विक व्यवस्था की स्थापना के लिए प्रमुख शक्तियों को दूसरे देशों के लिए उदाहरण बनना चाहिए । कोरोना के बहाने साझा हित को आगे बढ़ा कर जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष को डॉ . द्वारकानाथ शांताराम कोटनिस की याद दिलाई । इसके जरिए भारत ने चीन को याद दिलाया कि भारत अतीत में हमेशा संकट के समय चीन के साथ खड़ा रहा है । गौरतलब है कि डॉ . कोटनिस 1937 से 1942 तक चले जापान - चीन युद्ध के दौरान चिकित्सीय मदद के लिए चीन पहुंचे पांच सदस्यीय चिकित्सक दल का हिस्सा थे । उन्होंने घायल चीनी सैनिक की सेवा करते हुए महज 32 वर्ष की आयु में अपना जीवन गंवाया था । 
इस बीच रूस ने भी रखी अपनी बात ।
1962 में भारत - चीन के बीच तटस्थ रहने वाला तत्कालीन सोवियत संघ ( अब रूस ) नहीं चाहता कि दोनों देशों में तनाव बढ़े । रूस की पूरी कोशिश इस पूरे मामले से अमेरिका को दूर रखने की है । यही कारण है कि रूस ने कहा है कि भारत और चीन के बीच तनाव खत्म करने के लिए किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं है । रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लवारोव ने कहा , विवाद खत्म करने के लिए भारत और चीन अपने आप में सक्षम हैं ।
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