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शुक्रवार, 17 जुलाई 2020

आखिर चीन कीस वजह से अंतरराष्ट्रीय में चर्चा का विषय बना है।

समझने योग्य कुछ खास बातें:-
  • दक्षिण सागर के लिए चीन की योजना क्या है
  • कोविड-19 से चीन और अमेरिका के रिश्ते में खटास

संक्षिप्त में पड़े :-

 चीन पहले ही कई मुद्दों की वजह से अंतरराष्ट्रीय में चर्चा का विषय बना । है जैसे कोरोनावायरस अमेरिका के साथ व्यापारिक युद्ध हांगकांग का राष्ट्रीय सुरक्षा कानून ,लद्दाख में भारत के साथ तनाव और कुछ आर्थिक संकट जिन की मेजबानी चीन ने की , इन सब के बीच दक्षिण चीन सागर को भी हाल के महीनों में एक गंभीर तनाव क्षेत्र के रूप में पुनर्जीवित किया गया है। 


अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने अब पहली बार साफ तौर से यह कहा है कि दक्षिण चीन सागर में चीन के क्षेत्रीय दावे पूरी तरह गैर कानूनी है।

  •  दक्षिण सागर के लिए चीन की योजना क्या है, आगे समझिए


  दक्षिण चीन सागर पोत परिवहन का एक महत्वपूर्ण रूट रहा है जिसे लेकर बीते कई सालों से तनातनी है । इंडोनेशिया और वियतनाम के बीच पड़ने वाला समंदर का यह हिस्सा करीव 35 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है ,जिस पर चीन फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया ताईबान और ब्रुनेई अपना दावा करते रहे हैं ।

 कुदरती खजाने से लबरेज समुद्री के इस इलाके में जीवो की सैकड़ों प्रजातियां पाई जाती है। हाल के सालों में चीन ने इस बात पर और अधिक जोर देना शुरू किया है कि इस इलाके पर उसी का दावा है क्योंकि वह इस क्षेत्र में सदियों से है।

 माना जाता है कि अपने इसी दावे को मजबूती देने के लिए चीन दक्षिण चीन सागर में अपनी सैन्य उपस्थिति को बढ़ा रहा है। एक दशक पहले तक इस इलाके को लेकर इतनी तनातनी नहीं थी । 

लेकिन फीर चीन समंदर में खुदाई करने वाले जहाज बड़ी तादाद में रेत और बजरी लेकर दक्षिणी चीन सागर पहुंचा। उन्होंने एक छोटी समुद्री पट्टी के इर्द-गिर्द रेत बजरी ईटों और कंक्रीट की मदद से बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया।

 अमेरिकी पैसिफिक कमांड के पूर्व कमांडर एडमिरल हैरी हैरीस ने एक बार द ग्रेट वॉल ऑफ सैंड के रूप में इसका वर्णन करते हुए लिखा था।
चीन ने समंदर में अपने क्षेत्र के चारों ओर एक सुरक्षात्मक रिंग तैयार कर लिया है ,जो बहुत हद तक जमीन पर बनी दीवार जैसा है।
 लेकिन जब चीन और अमरीका एक दूसरे के साथ व्यापार तेज कर रहे थे तब भी दक्षिण चीन सागर जैसे मुद्दों पर कभी कभार तीखी बयानबाजी होती रही। पर दोनों देशों ने इस पर खुलकर मतभेद जाहिर नहीं किए दोनों के बीच संघर्ष के बावजूद अमरीका ने चीन के क्षेत्रीय विवादों में अन्य देशों के साथ खुलकर कोई पक्ष लेने से हमेशा परहेज किया । हालांकि अमेरिका यह जरूर कहता रहा इस क्षेत्र से जहाजों की आवाजाही पर कोई रोक ना लगे ।

  • और फिर कोविड-19 महामारी ने दस्तक दी।

चीन ने महामारी को ठीक से नहीं संभाला अमेरिका के नेतृत्व में चीन की है। आलोचना शुरु हुई जिसमें चीन को नाराज कर दिया। 

कई पश्चिमी देशों ने अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो के तरक पर सहमति दिखाई की चीन अपनी दमनकारी रवैया का प्रभाव बढ़ाने के लिए कोविड-19 महामारी का भी फायदा उठा रहा है। 

इन सब का नतीजा है कि दक्षिण चीन सागर में तनाव बढ़ रहा है । अप्रैल की शुरुआत में एक चीनी तटरक्षक पोत ने पैरासोल दीप समूह के निकट मछली पकड़ने वाले एक वृत्त नाम इस जहाज को टक्कर मारी और डूबा दिया। 

क्षेत्र पर चीन और वियतनाम दोनों अपना दावा करते हैं। फिर चीनी नौसेना और तटरक्षक बल द्वारा समर्पित एक चीनी समुद्री सर्वेक्षण पोत ने बोर्नियो के तट पर एक मलेशियाई तेल खोज परियोजना के काम को भी पारित किया। 

नतीजतन अमेरिकी नौसेना को एक युद्धपोत जिसे एक ऑस्ट्रेलियाई युद्धक जहाज का समर्थन प्राप्त था, उन्हें इस इलाके में तैनात करना पड़ा इसके बाद।


इसके बाद अमेरीका ने दो और बड़े युद्ध पोत पैरासेल और स्प्रैटली द्वीप के पास तैनात कर दिए। हाल ही में चीन ने पैरासेल द्वीप समूह के आसपास का क्षेत्र नौसैनिक अभ्यास करने के लिए बंद कर दिया। इस पर गुस्साए अमेरिका ने कहा कि विवाद ना बढ़े इसके लिए तो चीनी प्रति बधताएं हैं जिन्हें चीन ने क्षेत्र बंद करके उनका उल्लंघन किया है। 
 B-52 विमान

इस बीच अमरीकी नौसेना ने इस क्षेत्र में जॉइंट ऑपरेशन के लिए एक नहीं बल्कि 2 विमान वाहक युद्धपोत उतार दिए। इनके अलावा अमरीकी वायुसेना ने स्ट्रेटेजिक बामविंग के लिए मशहूर B-52 विमान भी इस क्षेत्र का चक्कर काटने के लिए भेजे। इसके बाद जैसी उम्मीद की गई थी। 

चीन के सरकारी मीडिया ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। अमेरिकी नौसेना के दक्षिण चीन सागर में उतरने का सबसे बड़ा खतरा।, यह है कि इन दो प्रतिद्वंदी शक्तियों में शत्रुता और भी तेजी से बढ़ सकती है जिसके बीच कोई बड़ी घटना होने का खतरा भी है। देखा गया है कि चीन अपनी मुख्य चिंताओं के प्रति पहले से ज्यादा मुखर हुआ है और रवैया पहले से ज्यादा अडीयल ऐसे में यह स्थिति विशेष रूप से खतरनाक है।

 भारत के साथ हाल ही में अपनी विवादित सीमा पर चीन ने घातक बल का प्रयोग किया। साथी हांगकांग में भी बलपूर्वक उसने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू किया। ऐसे मे सवाल बनता है कि दक्षिण चीन सागर के मामले में चीन कितना संयमित हो सकता है। 

चीन दक्षिण चीन सागर को अपनी समुद्री क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है। उसके लिए यह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक रूट है और इसे चीन के सपने का हिस्सा भी समझा जाता है जिसे चीनी बेल्ट एंड रोड परियोजना का नाम दिया गया है।

 चीन ने पहले दक्षिण चीन सागर में एक बंदरगाह बनाया था, फीर हवाई जहाजों के उतरने के लिए हवाई पट्टी देखते ही देखते चीन ने दक्षिणी चीन सागर में एक आर्टिफिशियल तैयार करके उस पर सैनिक अड्डा बना लिया। चीन के ग्रेट बे एरिया इकोनामिक डेवलपमेंट प्लान के लिए भी दक्षिण चीन सागर मैं महत्वपूर्ण है। इसी प्लान के अंतर्गत चीन ने हांगकांग को भी शामिल किया है ।

 दक्षिणी चीन सागर को आबाद करने की उनकी योजना को साल 2012 में लांच किया गया था। उस समय बूड़ी द्वीप पर स्थित शानशा सीटी को जिसे एक क्षेत्र में चीनी प्रशासनिक संचालन का केंद्र माना जाता है, उसे एक काउंटी में बड़ा दर्जा दिया गया था कि चीनी सरकार ने मछुआरों के समुदाय को यहां आधुनिक आवासों में फिर से बसाया, एक प्राथमिक स्कूल खोला, एक बैंक और एक अस्पताल बनाया। इसके अलावा वह मोबाइल संचार स्थापित किया और तभी से पर्यटक भी इन द्वीपों पर नियमित रूप से घूमने जाते रहे हैं। 

इन द्वीपों को आबाद करने की योजना का दूसरा चरण इस साल अप्रैल में शुरू किया गया था। जब चीन ने दो और काउंटी स्तर के प्रशासनिक जिल्लों का निर्माण किया। 6 सालों में जब से चीन ने दक्षिण चीन सागर के द्वीपों को आबाद करने की शुरुआत की है उपग्रहों और हवाई निगरानी के जरिए यही समझ आता है कि चीन ने इस क्षेत्र में समुद्री इंजीनियरिंग और सैन्य निर्माण का दुनिया का सबसे बड़ा कारनामा कर दिखाया है।

दीपों पर सैन्य सुविधाओं के अलावा 3000 मीटर का रनवे नौसेना के बर्थ, हैंगर गोला बारूद के बंकर मिसाइलों के कोषागार रडार साइटें व्यवस्थित आवासीय ब्लॉक प्रशासनिक भवन जो नीले सिनेमार्क टाइलों बने हैं , अस्पताल और यहां तक कि खेल परिसर भी बना दिए हैं ।

ऊपर से देखने पर यह द्वीप पहले से ज्यादा हरे दिखते हैं कुछ क्षेत्र जहां पर कोरल रीफ हैं, वहां अब खेती हो रही है दीपों के कुछ हिस्सों में चीन से लाए गए सूअरों के पालन केंद्र बनाए गए हैं। 

साथ ही मुर्गी और मछली पालन भी किया जा रहा है। इस बीच चीन एकेडमी ऑफ साइंसेज ने जनवरी 2019 में वहां समुद्र विज्ञान अनुसंधान केंद्र की स्थापना की।

 वहां रह रहे लोगों को 5जी नेटवर्क की सुविधा पहले ही मिल चुकी है। उनके अलावा कहां से फल सब्जियां जहाजों से भेजे जाते हैं, कुछ रीफ इलाके मछली पालन के लिए बहुत विकसित किए जा चुके हैं ।

हो सकता है बहुत जल्दी ही मछली पालन करने वाले परिवार इन दक्षिणी द्वीप ऊपर हमेशा के लिए बस जाएं और उनके बच्चे पार्टी और चीन के सरकारी अफसरों के बच्चों के साथ स्कूलों में पढ़े ।

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