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बुधवार, 15 जुलाई 2020

जीएएसआई के अनुसार झारखंड में है टंगस्टन,सरकार को दी है इसकी जानकारी ।

खनिज संपदाओं का भंडार माने जाने वाले झारखंड से एक बड़ी खबर आ रही है। झारखंड में टंगस्टन जैसे महत्वपूर्ण तत्व के अकूत भंडार का पता चला है ।

  टंगस्टन मिलने से  भारत को आत्मनिर्भर बना सकता हैं ,और इससे चीन से निर्भरता खत्म हो जाएगी । गढ़वा जिले के सुदूर इलाके में टंगस्टन के भंडार की जानकारी मिली है इसके बाद जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया यानी जीएसआई ने केंद्र सरकार को इस भंडार के बारे में अवगत करा दिया है। 

टंगस्टन रियल अर्थ एलिमेंट की श्रेणी में आता है।जीएसआई इस पर काम कर रही है , और अभी यह जी-3 स्टेज में है यानी कि अभी इस की मैपिंग की जा रही है। जीएसआई के सूत्रों के अनुसार इस साल के अंत में मैपिंग और ड्रीलिंग शुरू कर दी जाएगी ।

 यह टंगस्टन का भंडार कितना है इसका, आकलन फिलहाल अभी नहीं किया गया है। झारखंड में टंगस्टन कि पहली खदान है। भू -वैज्ञानिकों ने जानकारी देते हुए कहा कि झारखंड में टंगस्टन के मिलने से देश इस मामले में आत्मनिर्भर बन जाएगा और दूसरे देशों पर निर्भरता खत्म हो जाएगी।


आखिर टंगस्टन इतना उपयोगी क्यों है ।


2200 डिग्री सेंटीग्रेड तक तापमान वाली जगह पर इसका प्रयोग किया जा सकता है। टंगस्टन का गलनांक काफी कुछ होता है , यानि इससे बने पुर्जे काफी उच्च ताप पर पिघलते हैं। इसका रेट बल्ब के तंतु यानी फिलामेंट्स के निर्माण में इनका उपयोग होता था। आपको बता दें कि एक समय में सबसे ज्यादा प्रयोग बिजली के बल्ब में किया जाता था। हालांकि अब फाइटर जेट रॉकेट एयरक्राफ्ट एटॉमिक पावर, प्लांट रेलिंग और कटिंग टूल्स एंड लेस स्टील की वेल्डिंग इलेक्ट्रोड फ्लोरोसेंट लाइट दात के इलाज के अलावा उच्च तापमान वाली जगह में इसका इस्तेमाल होता है।

फिलहाल भारत में झारखंड मैं टंगस्टन के अलावा राजस्थान के नागौर महाराष्ट्र के नागपुर और बंगाल के बांकुड़ा में टंगस्टन भंडार होने की जानकारी मिली है। राजस्थान के डेगाना में सालों पहले टंगस्टन का पता चला था लेकिन खनन का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया।
भारत अभी सौ फीसदी टंगस्टन आयात करता है । टंगस्टन का सबसे बड़ा निर्यातक देश चीन है चीन में 56 फ़ीसदी, रूस में पांच फीसदी , वियतनाम में 3 फ़ीसदी और मंगोलिया में दो फीसदी टंगस्टन पाया जाता है। चीन के साथ व्यापार कम होने की स्थिति में देश के लिए टंगस्टन का नया भंडार काफी कारगर साबित होगा। 

2200 डिग्री सेंटीग्रेड तक तापमान वाली जगह पर इसका प्रयोग किया जा सकता है। टंगस्टन का गलनांक काफी कुछ होता है , यानि इससे बने पुर्जे काफी उच्च ताप पर पिघलते हैं। इसका रेट बल्ब के तंतु यानी फिलामेंट्स के निर्माण में इनका उपयोग होता था। फिलहाल भारत में झारखंड के अलावा राजस्थान के नागौर महाराष्ट्र के नागपुर और बंगाल के बांकुड़ा में टंगस्टन भंडार होने की जानकारी मिली है। राजस्थान के डेगाना में सालों पहले टंगस्टन का पता चला था लेकिन खनन का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया।

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