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शुक्रवार, 31 जुलाई 2020

भारत आखिर हैमर मिसाइल को खरीदने में इतनी दिलचस्पी क्यों दिखा रहा है ।

हैमर (HAMMER) का अर्थ है- (Highly agile and manoeuvrable munition extended range यानि फुर्तीली और परिवर्तनशील हथियार । यह एक रॉकेट एनेबल्ड हवा से जमीन पर मार करने वाली सटीक मिसाइल है जो ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 60 किमी की रेंज के लिए अनुकूल है ।


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जुलाई को अंबाला पहुंच रहे राफेल लड़ाकू विमानों को लेकर खबर है कि भारत फ़्रांस  से घातक हैमर मिसाइल खरीद का सौदा कर रहा है। यह सौदा भारतीय सेना इमरजेंसी पावर आकस्मित  समय में मिले  अधिकारों  के तहत कर रही है ।  इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि भारत से 70 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली  हेमर  मिसाइलों   की खरीद चीन से हो रहै तनाव के मद्देनजर कर रहा है

 समाचार एजेंसी  ए एन आई ने सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा है कि शॉर्ट नोटिस के बावजूद  फ्रांस हमारे  शॉर्ट नोटिस के बावजूद लड़ाकू विमानों की सप्लाई करने को तैयार हो गया है।


राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप 29 जुलाई को हरियाणा स्थित वायुसेना के अंबाला हवाई अड्डे पर लैंड करेगी ।  हैमर मिसाइल तैयार करने वाली कंपनी साफरान इलेक्ट्रॉनिक  एंड डिफेंस के मुताबिक हैमर मिसाइल दूर से ही  आसानी से इस्तेमाल की जा सकती है। 

 हवा से धरती पर मार करने वाली इस मिसाइल का निशाना  बहुत सटीक बताया जाता है। कंपनी का दावा है कि यह सिस्टम बहुत आसानी से तालमेल बैठा सकता।


यह गाइडेंस किसके सहारे निशाने हिट करता है ,  और कभी जाम नहीं होता  मिसाइल के आगे लगे गाइडेंस किट में जीपीएस इंफ्रारेड और रेजर जैसी किट होती है । हैमर  का असली  नाम Armement Air-Sol Modulaire है । 

जिसे फ्रांस के बाजार में बेचने के बाद हैमर (Highly Agile Modular Munition Extended Range)  बुलाया गया और उसके बाद इसका यही नाम प्रचलित हो गया ।  जो लड़ाकू विमान भारत नेपाल से लिए हैं उनमें पहले से ही हवा से हवा मार करने वाले लंबी दूरी वाले मिसाइलें लगी हुई है जो भारतीय वायु सेना की क्षमता को पड़ोसी मुल्कों की तुलना में कई गुना बढ़ा देंगे ।  इससे पहले 1971 में हुए भारत - पाकिस्तान युद्ध  को भारत के पक्ष में मोड़ने में भारतीय वायु सेना का अहम  किरदार था

     

पिछले 50 सालों में भारतीय वायुसेना की ताकत में इजाफा हुआ है, 250 किलोग्राम से शुरू होने वाली  हैमर मिसाइल  राफेल के अलावा मिराज लड़ाकू विमानों में भी  आसानी से लग जाती है ।


हालांकि फ्रांस के अलावा इस मिसाइल का उपयोग एशियाई देशों जैसे मिस्र ,  कतर जैसे  देश करते हैं । एनआईए सूत्रों के हवाले से कहा है कि यह मिसाइलें किसी भी क्षेत्र पहाड़ी इलाकों में तैयार बकरों को आसानी से भेद सकती है, मित्र। ऐसे में भारत के उत्तरी सीमा पर बसे लद्दाख का खास तौर पर जिक्र किया गया है । लद्धाख को लेकर इन दिनों भारत चीन के बीच विवाद जारी है। हालांकि भारत ने पॉलिसी फ्रंट पर कई फैसले लिए  जो चीन तरफ इशारा करते हैं ।

  युद्ध या किसी हमले को लेकर किसी भी तरह के  संकेत भारत की तरफ से नहीं  आए हैं और ना  ही चीन की तरफ से  ।  भारत और चीन इससे पहले भी 1962 में  युद्ध  लड़ चुके हैं । इसमें भारत को हार का सामना करना पड़ा था। कारगिल लद्दाख में जहां भारत-पाकिस्तान के बीच प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई सरकार के समय लड़ाई हुई थी ।



भारत  नए फ्रांस  से 36 लड़ाकू विमानों का सौदा   60  हज़ार  करोड़ रुपयों में किया है। हालांकि विमानों की सही कीमत को लेकर बहुत सारे विवाद रहे हैं और राफेल लड़ाकू विमान  का मामला भारत की सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है । 

लेकिन वहां भी सुरक्षा कारणों  को लेकर सारी बातें सामने नहीं आ पाई । कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने किया की हैमर का सौदा  राफेल डील के वक्त ही क्यों नहीं किया गया । एक ट्वीट कांग्रेस नेता ने  पूछा है कि इससे सस्ते मिलने वाले स्पाइस जैसे मिसाइलों के बारे में क्यों नहीं सोचा गया  जो भारतीय सेना के पास पहले से ही है ।


फ्रांस की सेना में मौजूद है मर मिसाइल इससे पहले अफगानिस्तान और लीबिया में भी हो चुका है  इसको बनाने वाली कंपनी का दावा है कि इससे पहले हुए इसके इस्तेमाल बहुत ही कामयाब हुए हैं ।  भारत फ्रांस से कितने मिसाइल और किस कीमत पर खरीद रहा है इसकी जानकारी अभी तक नहीं दी गई है ।  इंडिया टुडे  के पत्रिका के अनुसार 100 मिसाइलों के सौदे की बात की है ।

 बीजेपी के महासचिव

उपेंद्र यादव ने कहा है कि  जो भारत  औरउसकी सीमा की सुरक्षा को लेकर सवाल कर रहे हैं। उनके लिए यह जानकारी   है कि भारत  राफेल को  मिसाइलों से लैस कर रहा है। दुश्मन के बं कर भी अब बच नहीं पाएंगे बीजेपी सरकार राफेल की कीमत  के सवाल को भी राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बनाने में कामयाब रही थी ।


  1980 में जब बोफोर्स तोपें खरीदी गई थी उस समय भी जिन लोगों ने उसकी कीमत पर सवाल पूछे थे उसने भारतीय जनता पार्टी सबसे आगे थी । स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट के मुताबिक अमेरिका और चीन के बाद भारत रक्षा पर खर्च करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है और दक्षिणी एशिया में तो इसका स्थान सबसे ऊपर है । पिछले साल  के मुकाबले  भारत के सुरक्षा बजट में 6.8 की बढ़ोतरी  हुई है जो साल 2019 में 71.1 अरब डालर था ।  लेकिन शायद भारत का कोई भी सुरक्षा सौदा विवाद से कभी दूर रहा है चाहे वह 1980 में हुए जीप   का सौदा,  बोफोर्स तोप या फिर  राफेल  काश वाला ।


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