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गुरुवार, 13 अगस्त 2020

भारत की आसमानी सुरक्षा (एयर डिफेंस )

आसमान सुरक्षा (एयर डिफेंस) भी देश को अपनी आसमानी

सुरक्षा की सबसे बड़ी चिंता होती है, क्योंकि एयर डिफेंस

किसी भी देश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है आकाश के

रास्ता कोई भी दुश्मन देश आसानी से हमारे देश में घुसकर

हमारे जन संसाधन को नुकसान पहुंच गया है, जिससे हमारा

देश कई साल पीछे जा सकता है। इसलिए सभी देश

रिकोनोसेन्स मिशन भी चलाते हैं।


कोई भी देश अपने आसमानी सुरक्षा (एयर डिफेन्स)

दो प्रकार से करता है। जैसे: -  

  1. एयर टू एयर डिफेन्स (हवा से हवा में सुरक्षा)
  2. सरफेस टू एयर डिफेन्स ( धरती से आसमान की
रक्षा )

.................................................. ..................................................

  •  एयर टू एयर डिफेंस (हवा से हवा में सुरक्षा): -

हवा में सुरक्षा देने की जिम्मेबारी भारत में वायु सेना की है । 
नरेश्वरी है। आकाशी सुरक्षा प्रदान करने के लिए भारत के पास
लड़ाकू विमान है। जब कोई भी देश के अंदर दूसरे देश के
सीमा में घुसने का प्रयास करते हैं तो वायु सेना अपने लड़ाकू
विमान को उनके पीछे भेज देते है। पहले तो उन्हें चेतावनी
दी जाती है, और उन्हें किसी के पास के एयर पोर्ट पर जबरदस्ती
निकाला जाता है ,या उन्हें अपनी सीमा से बाहर निकालने को
कहा जाता है, फिर भी वह दूसरे देश का अभिमान नहीं मानता
है तो उसे हवा में ही मार कर गिरा दिया जाता है।

        


भारत के पास एयर टू एयर डेफेंस के लिए भी कई प्रकार के

लड़ाकू विमान है : -

  1.  मीग- 21 (मिग - 21)

  2. मीग- 23 (मिग - 23)

  3. मीग- 29 (मिग - 29) अधिकतम- 29 को अपग्रेड कर के

29 वर्तमान नाम माइग -29 यूस्टर है। )
4. सुखोई - 30MKI (SUKHOI - 30MKI)

भारत की सतह से हवा में डीफेंस सिस्टम

 : - पृथ्वी से आकाश की सुरक्षा के लिए पृथ्वी -एस-सतह परबड़े-बड़े मिसाइलों को एक जगह रखने को दिया जाता है। औरइन मिसाइलों के साथ एक रडार भी होता है जो  आसमान में हर समय नजर रखता है जैसे ही इसके जुड़वां में कोई अनजान जहाज आता है तो यह मिसाइल अपने आप उस जहाज को मारने के लिए निकल जाती है। भारत के पास ऐसे बहुत सारे सर्फेस टू एयर मिसाइल  है जो हमारे देश की सीमा पर तैनात है। भारत के पास इस समय के करीब से लेकर 2000 तक मार करने वाले मिसाइल हैं । भारत में अपनी धरती से हवा के डिफेंस सिस्टम को चार भागों में में बांटा है। जिसे हम आगे जानेगे

1. फ़र्स्ट लेयर (First layer): - भारत के पहले सुरक्षा के लिए मीसाईल की दूरी 10 से 50 किलोमीटर तक की होती है। भारत इस समय इजराइल में बनी स्पाइडर  एयर डिफेंस का इस्तेमाल कर रही है। भारत इस समय दो प्रकार के मिसाईल इस्तेमाल कर रही है जिनका नाम पायथन और डेरबी है


A . पाइथन: - पाइथन मिसाइल कम दूरी पर मार करने मिसाईल है इसकी दूरी 5 से 20 किलोमीटर तक की होती है।

B. डैरवे: - डैरवे पैथान की तरह कम दूरी पर मार कर मिसाईल है इसकी दूरी पाइथान मिसाईल से ज्यादा है । इसकी सीमा 50 किलोमीटर तक की होती है ।

दूसरी परत (Second layer ) : - मीडियम रेंज की मिसाइल रखी गई है। मारक है क्षमता 30 से 100 किलोमीटर तक की होती है। इस भारत में ही बने आकाश मिसाईल और इजराइल और भारत द्वारा संयुक्त रूप से बनाई गई बाराक 8 मिसाईल का उपयोग कर रही है ।


3. तीसरी परत (Third layer): - भारत ने तीसरे लेयर में अपनी लंबी दूरी की मिसाइलें रखी हैं ,जिसमें से एक सोवियत संघ (रूस) द्वारा निर्मित s-400 मिसाईल और भारत के DRDO द्वारा निर्मित XR -SAM मिसाईल किया इस्तेमाल कर रहा है।


4.चौथी परत (fourth layer): - भारत अपने चौथे लेयर में ए ए डी (AAD) और पी ए डी (PAD) मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है इनकी मारक क्षमता 2000 किलोमीटर है ।


भारत के 4 लेयर वाली सर्फ़र टू एयर एयर डेफ़ेंस मिसाईलभारत को अपने दुश्मनों से एक मजबूत सुरक्षा प्रदान करती है। इसलिए लेयर की सुरक्षा बनाने के पीछे बहुत कारण शामिल हैं। दुनिया का एडवांस से एडवांस एयर डिफेन्स सिस्टम भी कभी होजाता है। अधिक से अधिक लेयर बनाने से फायदा होता है कि यदि एक एयर डिफेंस फेल भी हो गया है, तो दूसरा एयर डिफेंससिस्टम उसकी जगह ले सकता है।


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