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बुधवार, 12 अगस्त 2020

राफेल और उसके टेक्नोलोजी की पूरी जानकारी (Rafale or iske technology ki puri jaankari )

इस ब्लॉग में हम राफेल (रफाल) और  उसके टेक्नोलोजी  फाइटर की जानकारी विस्तार से जानेंगे जो भारतीय वायुसेना में 28 जुलाई को शामिल हो चुका है। राफेल का कार्यक्रम फ्रांस में 1985 में शुरू हुआ था। इस प्लेन के डिज़ाइनर मार्स डसॉल्ट है जो डसलेट कंपनी के एक्टिव मेंबर है। इस प्लेन का जो पहला प्रोटोटाइप 1986 में उड़ा था।


प्रोटोटाइप एक तरह का श्रृंखला डेमोंस्ट्रेटर होता है। फ्रांस की सरकार को जब यह प्रोटोटाइप पसंद आ गया तो उसमें ऑफीशियली इसको अप्रूवल दे दिया और अपने आर्म फोर्स में शामिल करने का बजट निकाल दिया ।1987 से इसका प्लांट ऑफीशियली शुरू हो गया। 2004 को पहला फाइटर प्लेन फ्रांस की नेवी में शामिल किया गया। 2006 को फ्रांस के एयरफोर्स मैं इसे शामिल किया गया।

मार्स डसॉल्ट

 एक एयर फोर्स को कई तरह के मिशन करने होते हैं, उनके लिए अलग अलग तरह के फाइटर प्लेन की जरूरत होती है। जैसे की : - 

  • एक फाइटर प्लेन के मिशन।

  1. एयर सिक्योरिटी ( Air security)click here

  2. रिकॉग्निशंस मिशन (Reconnaissance mission )

  3. टेकटीकल बोम्बिंग ( techtical Bombing) click here

  4. स्ट्रेटेजिक बोम्बिंग ( stratagical Bombing)click here

  5. स्ट्राइक फाइटर

  6.  न्यूक्लियर नेवल ऑपरेशन

जब राफेल को डिजाइन किया जा रहा था तो इस बात का ध्यान रखते हुए इसका डिजाइन किया की यह सभी प्रकार के ऑपरेशन करने में सक्षम हो, और सभी फाइटर प्लेन की खुबियाँ भी हो ।

राफेल को मल्टीरोल फाइटर प्लेन नहीं है यह ओमनी रोल फाइटर प्लेन हैं।

  • मल्टीरोल फाइटर भी पूरे ऑपरेशन कर लेता है। लेकिन इतने पर प्रभावली वह सभी ऑपरेशन नहीं कर सकता है। लेकिन राफेल इकलौता ऐसा फाइटर प्लेन है जो पूरे ऑपरेशन बिल्कुल कर लेता है। इसीलिए इसको ओम्नी रोल फाइटर कहा जाता है।

राफेल का वज़न बिना हथियारों के 11 टन है और राफेल अपने साथ 16 टन के हथियार और फ्यूल को लेकर उड़ सकता है। राफेल अपने वजन से डेढ गुना ज्यादा सामान लेकर उड सकता है ,यह अकेला फाइटर प्लेन है जिसकी वजन उठाने की क्षमता इतनी ज्यादा है। यह राफेल का विश्व रिकॉर्ड है जो इसे एक विशेष प्रकार का प्लेन बनाता है।


एक राफेल फाइटर प्लेन को बनाने के लिए 25 किलोमीटर वायर का इस्तेमाल होता है, इससे हम अंदाजा लगा सकते हैं कि यह मशीन बहुत कॉन्प्लेक्स (जटिल प्रक्रिया) है। 3000 से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट इसमें इस्तेमाल किये जाते है।


राफेल को डिजाइन करने वाला सॉफ्टवेयर: -


राफेल को बनाने के लिए कंपनी ने अपना ही एक सॉफ्टवेयर बनाया । उस सॉफ्टवेयर का नाम कात्या है। इस सॉफ्टवेयर में उन्होंने राफेल में लगने वाले हर एक सामान का डिजाइन किया यहां तक ​​कि 1 मिलीमीटर तक के पार्ट भी इस सॉफ्टवेयर में किया डिजाइन किया गया, और उसे इसी सॉफ्टवेयर में लगाकर टेस्ट भी किया गया और उसके बाद जमीन में इसका काम शुरू किया गया। डसॉल्ट कंपनी इस सॉफ्टवेयर को दूसरी कंपनियों को भी लाइसेंस पर इस्तेमाल करने के लिए देती है।

एक राफेल को बनाने का समय: -



एक राफ़ेल को बनाने के लिए 2 साल का समय लगता है और 7000 लोगों की टीम लगती है, इससे हमें पता लगता है कि इस मशीन को बनाना कितना मुशकील है।

डस्ट कंपनी ने राफेल वर्जन को 3 भाग में बांटा है: -

  1. राफेल - बी (राफेल-बी) = राफेल -बी ट्रेनिग वैरीअंट है जो खास पायलेट को प्रशिक्षण देने के लिए बनाया गया है ।

  2. राफेल - सी (रैफल्स सी): - राफेल सी जिसे जमीनी स्तर में लड़ने के लिए बनाया गया है।

  3. राफेल एम: - राफेल एम नेवी के लिए बनाया गया है , जो नेवी के ऑपरेशन में मदद करता है

 राफेल मीडियम और छोटे रनवे पर टेक ऑफ़ कर लेता है । इसलिए राफेल को बडे रनवे की ज़रूरत नहीं होती है, राफ़ेल को सिर्फ 400 मीटर का रनवे टेकऑफ़ के लिए चाहिए जोकि एक महत्वपूर्ण बात है ।राफ़ेल एक एयरक्राफ्ट कैरियर से संचालन करने के लिए बहुत ही शानदार फाइटर प्लेन है।


राफेल लड़ाकू विमान की खासियत: -

  1. फ्रांस की डसाल्ट कंपनी ने बनाई है।

  2. 35.4 फुट चौड़ाई।

  3. पंखों सहित 492 क्वायर फुट कुल चौड़ाई।

  4. 33.8 फुट की लंबाई है।

  5. 17.4 फुट की ऊंचाई है।

  6.  1750 केटीएस की गति से उड़ता है।

  7.  450 मीटर के क्षेत्र में घुसने में सक्षम।

  8. 1000 फुट की दिशा में सेकेंड की अपवाह उड़ सकती है।

  9. 55000 फुट की ऊंचाई से बम गिराने में सक्षम है।

राफेल में बहुत ही विशेष टेक्नोलॉजीज ओर हतियार इस्तेमाल किया गया है। जैसे की: - 

  1. टेलीस्कोपिक पॉड 

  2. रीकोनेसेन्स पोड (टोही फली)

  3.  सपेक्ट्रा (स्पेक्ट्रा) 

 हथियार (Weapon)

  1. माइक मिसाइल

  2. मैटीयोर मिसाइल

  3. सेल्फ़ क्रूज़ मिसाइल  

  4. लेजर एंड जीपीएस गाईडेड बॉम्ब 

  5. एंटी शिप मिसाइल

  6.  लेजर टारगेटिंग पोड़ 

  7.  गिया गन  

राफेल विमान का एक साथ 100 किलोमीटर के रेडियस में आने वाले 40 जगह को टारगेट द्वारा उसे एक साथ मार सकता है।


अगर आपको लगता है कि सारे फाइटर प्लेन का काम एक अकेला फाइटर प्लेन करे तो यहां पर राफेल सबसे अच्छा फाइटर प्लेन है।

  • टेलीस्कोपिक पॉड :- राफ़ेल फ़ाइटेर प्लेन  के आगे टेलीस्कोपिक पॉड लगाए गए हैं । यह टेलीस्कोपिक पॉड का  काम टारगेट को ट्रेक करना ओर  उसकी एक ऑप्टिकल इमेज  जनरेट करके पायलट को दिखाना  है,


 इसकी एक खास बात यह है कि यह ना सिर्फ अपने रडार से बल्कि दूसरे प्लेन के रडार का डाटा भी ले सकता है। यानी कि राफ़ेल का पायलट उन चीजों को भी देख सकता हे जो दूसरे प्लेन में बेठा पाइलेट उस समय देख रहा होता है।इससे राफ़ेल के पाइलेट सारी इनफार्मेशन मिल जाती है। तो यह एक तरह से जो है दूर देखने वाला एक टेलिस्कोप हो जाता है जो कि  जूम करके पायलट के पास जो एक बहुत बढ़िया इमेजेस  पहुँचाता है, इसलिए यह राफ़ेल का एक स्पेशल फीचर हो जाता है। 

  • रीकोनेसेन्स पोड ( Reconnaissance pod ) : - इस फाइटर प्लेन मे रीकोनेसेन्स पोड लगा होता है।जो इसे रिकी वाले ऑपरेशन को करने में मदद करता है ।


इस रीकोनेसेन्स पोड़ का वजन 1 टन का होता है जो राफेल के नीचे लगाया जाता है । यह रीकोनेसेन्स पॉड एक पावरफुल डिजिटल कैमरा है । यह डिजिटल कैमरा 1 सेंटीमीटर प्रीसीजन (Precision ) से इमेजेस कैप्चर कर सकता है । अगर यह प्लेन सुपर सोनिक की रफ्तार से भी चल रहा है , फिर भी यह सब  की साफ़ तस्वीरें लेकर डाटा इकट्ठा कर सकता है । जिससे यह दुश्मन के एरिया का सतीक जानकारी इकट्ठा करने में भी माहिर है ।

  • सपेक्ट्रा ( spectra ):- स्पेक्ट्रा एक और राफेल का फीचर है जो इसकी टेल ( पलेन का पिछला हिस्सा ) , पंखों के नीचे जेसी जगह मैं लगे होते है ,


इसमें एक खास तरह का सेंसर होता है, जो दुश्मन  के रडार के सिग्नल को जाम करने का काम करता है। दुश्मन के रडार की जो रेंज आ रही है उसे उसी फ्रीक्वेंसी को जो मैच करके उनके रडार को काउंटर अटैक करता है । सेक्टर डिकॉय सिग्नल छोड़ने का भी काम करता है  अगर दुश्मन ने कोई मिसाइल छोड़ी है तो उस मिसाइल को डाइवर्ट करने का काम करते हैं और साथ में  यह सिग्नल ट्रेस करके पायलट को वार्निंग दे देता हैं जो प्लेन को मरने के लिए आ रही होती है ताकि पायलट काउंटर अटैक करने के लिए जल्दी से तैयार हो जाए । स्पेक्ट्रा एक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स भी छोड़ता है जो दुश्मन के हिट् सीकिंग मिसाइल को चकमा देने के लिए मशहूर है ।


आप बात करते हैं इसके हथियारों की :-

  1. माइका मिसाइल : - हवा से हवा में मार करने वाला ( Air To Air mesile ) इसकी मारक क्षमता 50 किलोमीटर है अगर हवा में लड़ाई करनी हो तो इस मिसायल का उपयोग किया जाता है।
  2. मैटीयोर मिसाइल : -हवा से हवा में मार करने वाला ( Air To Air mesile ) इसकी मारक क्षमता 150 km है । इसमें किए गए नए संशोधन के अनुसार ये अब 2०० km तक इसकी मारक क्षमता हो चुकी है। यह अब तक की दुनिया की सबसे अच्छी हवा से हवा मे मार करने वाली मिसाइल माना जाता है।
  3. स्केलफ क्रूज मिसाइल : - स्केलफ क्रूज़ मिसाईल एक आसमान से धरती पर मरने वाले मिसाइल है इसकी मारक क्षमता सिरसा से 500 किलोमीटर तक की है । 
  4. लेजर एंड जी पीएस गाईडेड बॉम्ब : - लेजर एंड जी पीएस गाईडेड बॉम्ब को हम 10 किलोमीटर दूर से ही मार सकते हैं। इसके बाद यह लेजर गाइडेड बम लाइट करते हुए अपने लक्ष्य तक खुद ही चले जाती है । जिससे हमारे फाइटर प्लेन को अपने टारगेट के नजदीक जाना नहीं पड़ता ।
  5. एकसोसेंट एंटीशिप मिसाइल : - इस मिसाइल की रेंज 70 किलोमीटर की होती है, यह मिसाइल किसी वॉर शीप को पूरी तरह से खत्म करने में सक्षम होते हैं ।
  6. लेजर टारगेटिंग पोड़ :- लेजर टारगेटिंग पोड़ उस समय काम आता है जब हमें किसी जगह पर स्टिक तरीके से बोम्बिंग करनी होती है । उस समय लेजर टारगेटिंग पोड़ उन जगहों को चिन्हित करता है जहां पर हमने बम बिंग करनी है। लेजर टारगेटिंग पोड़ से हम एक समय पर कई जगह को टारगेट करके उस पर एक समय में ही बम गिरा सकते हैं।
  7. गिया गन :- जब राफेल को नजदीकी लड़ाई लड़ने होती है तो इसके लिए इसमें एक गन भी है। जो पहले तो राहुल के अंदर छुपी होती है जरूरत पड़ने पर यह नीचे से निकल जाती है और नजदीकी लड़ाई के लिए तैयार हो जाती है।

 यह गन 1 मिनट में 3000 राउंड फायर करती है।



8.  लंबी दूरी के मिशन :- जब राफेल को लंबी दूरी के मिशन करना होता है तो इसमें 2000 लीटर तक अधिक फ्यूल कैरी कर सकते
      हैं । जिससे यह अधिक दूरी तक जाकर मिशन कर सकता है । 

 जो कि आज तक के सभी फाइटर प्लेन यह काम नहीं कर सकते हैं ।यह दुनिया का एक ऐसा लड़ाकू विमान है जो कितने प्रकार के हथियार को अपने साथ लेकर उड़ता है और जिसने इतनी सारी खुबियाँ एक साथ है ।

9.  कंप्यूटर कंट्रोल कैनार्ड :- कंप्यूटर कंट्रोल कैनार्ड प्लेन के आगे लगा हुआ होता है जो प्लेन को स्थिर रखने में काम आता है ।
      कंप्यूटर कंट्रोल कैनार्ड पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड है। जिससे पायलट को इस प्लेन को संभालने के लिए ज्यादा ध्यान नहीं देना             पड़ता है और इसी के कारण जो है यह प्लेन आसानी से किसी भी तरीके के मूवमेंट को आसानी से संभाल लेता है। 


कंप्यूटर कंट्रोल कैनार्ड एयर ब्रेकिंग का भी काम करते हैं जो राफेल को उतरते वक्त मदद करते हैं । यह दुनिया का एक ऐसा प्लेन है जो सबसे कम रफतार पर लैंड करता है। इसको इतने कम रफ्तार से लैंड करने पर इसके ब्रेकिंग सिस्टम पर ज्यादा जोर नहीं पड़ता और इसकी लाइफ बढ़ जाती है। कम रफ्तार पर लैंड करने से नेवी के एयरक्राफ्ट पर लैंडिंग के मामले में राशि सबसे ज्यादा अच्छा प्लेन है।

यह फाइटर प्लेन पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड है जिससे यह हर एक उड़ान के बाद अपना चेकअप खुद ही कर लेता है और फाइटर प्लेन के डिस्प्ले में दिखा देता है कि कौन सा ऐसा प्लेन का खराब है कि से बदलने की जरूरत है एक हिसाब सही है अपना इलाज खुद ही कर लेता है। 
जिससे इसकी मेंटेनेंस के लिए ज्यादा वक्त नहीं लगता है। राफेल फाइटर प्लेन का डिजाइन मॉड्यूलर होने के कारण इसका
इंजन 1 घंटे में ही बदला जा सकता है जबकि दूसरे प्लेनों का इंजन बदलने के लिए कई दिन का वक्त लग जाता है ।



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