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रविवार, 26 जुलाई 2020

भारत सरकार ब्रह्मपुत्र नदी के अंदर सुरंग बनाने के प्रोजेक्ट की तैयारी ।



भारत सरकार ने ब्रह्मपुत्र नदी के अंदर करीब 14.8 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने के प्रोजेक्ट की तैयारी कर रही है

  1. ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाले रेलवे टनल का महत्व ।

असम में ब्रह्मपुत्र नदी में आई भयंकर बाढ़ ने कहर बरसा रखा है। दूसरी ओर देश के उत्तर पूर्वी राज्य असम का एक बड़ा हिस्सा इस बाढ़ की चपेट में है। दूसरी ओर माना जा रहा है कि भारत सरकार ने ब्रह्मपुत्र नदी के अंदर करीब 14.8 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने के प्रोजेक्ट को सैद्धांतिक तौर पर अपनी मंजूरी दे दी है। इस सुरंग के जरिए चीन की सीमा तक बिना बाधा आवाजाही सुनिश्चित हो पाएगी। अब इस नदी के नीचे14 .85 किलोमीटर लंबी सुरंग दक्षिणी किनारे पर सूमाली गढ़ और उत्तरी किनारे पर गोहूपुर को छोड़ेगी या नागरिक और सैन्य आवाजाही का वैकल्पिक रास्ता हो पाएगा। 




  • इस पर बीजेपी अध्यक्ष रंजीत कुमार दास का ट्वीट ।

ब्रह्मपुत्र नदी के अंदर करीब 14.8 किलोमीटर लंबी सुरंग  के वारे में केंद्र और राज्य की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने 16 जुलाई को इस सुरंग की योजना के बारे में सूचना प्रकाशित कि असम में बीजेपी अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने एक ट्वीट में लिखा है कि ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे चार लाइन वाली सुरंग के निर्माण के लिए केंद्र सरकार से सैद्धांतिक मंजूरी मिलना, असम नॉर्थईस्ट और पूरे भारत की सुरक्षा और आवाजाही के लिहाज से एक ऐतिहासिक फैसला है।

  • मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने समाचार एजेंसी ए एन आई के रिपोर्टों को बताया ।

 दूसरी ओर ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के बड़े नेटवर्क में बाढ़ के पानी।बड़ी तबाही मचाई हुई है 20 जुलाई को असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने समाचार एजेंसी ए एन आई को बताया कि गुजरे कुछ दिनों में इस बाढ़ से कम से कम 85 लोगों की मौत हुई है , और करीब 70 लाख लोग इससे प्रभावित हुए हैं, इस बाढ़ से प्रभावित और मारे गए लोगों की तादाद कोविड-19 महामारी के मुकाबले कहीं ज्यादा है। 

  • ब्रह्मपुत्र नदी का उद्गम स्थल

ब्रह्मपुत्र नदी चीन में तिब्बत से निकलती है। जो भारत भूटान और बांग्लादेश तक जाती है और 5 लाख 80 हज़ार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली है। इसकी गिनती दुनिया की 5 सबसे बड़ी नदियों में होती है अपने। मुख से 19830 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड वाटर डिस्चार्ज के साथ ब्रह्मपुत्र का नंबर ऐमेज़ॉन कांगो और यांग सी के बाद आता है।

  • प्राचीन के युद्ध में ब्रह्मपुत्र नदि आहोम की नौसेना को ब्रह्मपुत्र नदी का महत्व

 पूर्वोत्तर भारत में इसकी एक रणनीतिक अहमियत भी है। सन 1228 से 1826 तक इस इलाके पर शासन करने वाले आहोम में राज्य की एक नौ सेना इस नदी में तैनात थी । यह नौ सेना मुगल साम्राज्य समेत दूसरे शत्रुओं से सुरक्षा के लिए लगाई गई थी। 

 सन 1671 की सराय घाट की जंग में आहोम नौसेना ने औरंगजेब की कमांडर राम सिंह के अगुवाई वाली कहीं विशाल सेना को धूल चटा दी थी और इस तरह से इस इलाके में मुगलों के विस्तार पर लगाम लगा दी गई थी ।


  • आखिर क्यों आहोम में साम्राज्य की रक्षक रही ब्रह्मपुत्र आज भारतीय सेना के योजनाकारों के लिए चिंता की एक वजह बन बनी हुई है


कभी आहोम में साम्राज्य की रक्षक रही ब्रह्मपुत्र आज भारतीय सेना के योजनाकारों के लिए चिंता की एक वजह बन रही है, क्योंकि इस नदी की वजह से असम का उत्तरी हिस्सा और अरुणाचल प्रदेश का पूरा उत्तर पूर्वी हिसा चीन की सेना के खतरे की जद में है। चीन ने 1962 की जंग के बाद से इस पूरे इलाके में तेजी से अपनी पैठ मजबूत की है। भारत के सुरक्षा तंत्र को लगता है कि चीनी सेना के ब्रह्मपुत्र पर बने पांच मौजूदा पुलों पर हमला करने की ताकत से अरुणाचल प्रदेश और असम के हिस्से बाकी के भारत से कट सकते हैं। 

  • खबर की पड़ताल विभिन्न अखबारों के मुताबिक


अंग्रेजी दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स ने हाल ही में एक खबर प्रकाशित की थी कि भारतीय सेना ने सरकार से ब्रह्मपुत्र नदी पर सुरंगे बनाने पर विचार करने के लिए कहा था । 
हिंदुस्तान टाइम्स ने खबर में ये भी लिखा था कि सुरंग बनाने के फैसले पर सरकार ने मार्च में ही मुहर लगा दी थी जो कि चीन के साथ सीमा पर पैदा हुए तनातनी के माहौल से काफी पहले की बात है। 
इंग्लिश न्यूज़ चैनल  वियोन की खबर के मुताबिक भारत ने चीन से सटी सीमा पर सड़कें बनाने पर होने वाला खर्च 2016 के 61.5 करोड डॉलर से बढ़ाकर 2020 में 1.6 अरब डालर कर दिया है। भारत सरकार इस घटना को दबाती नजर आ रही है। क्योंकि इस नदी पर बने हुए पूल को दुश्मन देश की फौज आसानी का निशाना बन सकते हैं।
 इकोनामिक टाइम्स ने भी पिछले साल इस बारे में एक खबर दी थी। उसमें बताया गया था कि भारत सरकार ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे सुरंग बनाने पर विचार कर रही है।
किसी भी सरकारी अफसर ने सुरंग के मसले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। साथ ही इस मसले पर चीन की तरफ से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। भारत की राष्ट्रीय मीडिया में इस मसले पर छिटपुट कवरेज हुई है।

 टीटी ने अप्रैल 2019 की अपनी रिपोर्ट में कहा था कि यह सुरंग सैन्य काफीलों की आवाजाही को पूरी तरह से सुरक्षा मुहैया कराएगी। भारत-चीन के बीच चल रहे मौजूदा, सीमा, विवाद और सुरंग के लिए मंजूरी मिलने को आपस में जोड़ा जाना आसान बात है।
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत सरकार पहले से ही चीन के मुकाबले बॉर्डर पर अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में युद्ध स्तर पर कोशिशें कर रही है। अंडरवाटर टनल बनाने की योजना को इसी कड़ी में देखा जा सकता है। 

  • इस खबर पर आसाम के आम लोगों की प्रतिक्रिया ।

लेकिन असम में से लेकर काफी चर्चा हो रही है असमिया भाषा के एक प्रमुख दैनिक अखबार असोमिया प्रतिदिन के 17 जुलाई के संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि सरकार केवल अंडरवाटर टनल की चर्चा छेड़ कर सुर्खियां बटोरना चाहती है, जबकि कई दूसरी बुनियादी क्षेत्र की परियोजनाएं वादा करने के बावजूद अभी तक जमीनी हकीकत में तब्दील नहीं हो पाई है। सोशल मीडिया यूजर्स भी हर साल असम की बाढ़ में लाखों लोगों के प्रभावित होने और सरकार के इसे ना रोक पाने के चलते टनल बनाने के प्लान की खिल्ली उड़ाते दिख रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई मींस भी चल रहे हैं। एक फेसबुक यूजर ने लिखा है नदी के नीचे कोई सुरंग बनाने की जरूरत नहीं है। पहले नदी के किनारों को बनाइए ताकि बाढ़ से असम के लोगों को बचाया जा सके। 

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